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Sunday, June 10, 2018

जय हो बंदी कुमार

शिक्षा का बंटाधार, हर जगह वयाप्त भ्रस्टाचार है
हर रोज महिलाओं का होता बलात्कार है
क्योंकि अब यहां
विकास और सुशासन की सरकार है

मजदूर मजबूर, युवा बेरोजगार है
जनता पर कर और मँहगाई की मार है
क्योंकि अब यहां
सामाजिक न्याय की सरकार है

किसान बेबस और लाचार है
सरकारी नीतियों में बंदी की भरमार
क्योंकि अब यहां
नेता बंदी कुमार है

एक अधूरी कविता

ये उछलते-कूदते शब्द अख़बारों के ये चीखती आवाजें बुद्धू-बक्सदारों के ये अजीब बेचैनी इन रसूखदारों के ये छलांग, ये चीखें, ये बेचैनी, ये फ...